महिला आरक्षण संशोधन पर संसद में घमासान, 33% लागू करने पर बहस तेज

Thu 16-Apr-2026,12:41 PM IST +05:30

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महिला आरक्षण संशोधन पर संसद में घमासान, 33% लागू करने पर बहस तेज Women-Reservation-Amendment-Bill-Parliament-Debate-2026
  • केंद्र सरकार ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े तीन संशोधन विधेयक पेश किए, जिनका उद्देश्य 2029 तक 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है।

  • लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव, जिसमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना शामिल है।

  • विपक्ष ने परिसीमन और सीट बढ़ोतरी पर सवाल उठाए, जबकि सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक और जरूरी कदम बता रही है।

Delhi / Delhi :

DELHI/ संसद के विशेष सत्र की शुरुआत के साथ ही महिला आरक्षण मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देना और आरक्षण व्यवस्था को जल्द लागू करना है।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस दिशा में सबसे बड़ा बदलाव लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि का है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 850 तक करने की योजना है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रस्ताव शामिल है।

इन प्रस्तावों के तहत लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। सीटों के इस नए ढांचे को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

महिला आरक्षण से जुड़ा मूल कानून 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के रूप में पारित हुआ था। हालांकि उसमें यह शर्त रखी गई थी कि आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी होगा, जिससे इसके लागू होने में देरी की आशंका थी। अब सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का प्रस्ताव दिया है।

यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही कई राज्यों की विधानसभा चुनावों में भी महिला आरक्षण लागू हो सकता है।

इस मुद्दे पर संसद में तीखी बहस भी देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इसे अधूरा बताया और मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग की। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण संविधान के अनुरूप नहीं है।

वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विषय को उठाया, जिस पर अमित शाह ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो अपने टिकटों में महिलाओं और अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता दे सकते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के सिद्धांत के पक्ष में है, लेकिन लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध करेगी। विपक्षी दलों ने संयुक्त रणनीति बनाते हुए इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी की है।

सरकार ने इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के लिए लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे का समय निर्धारित किया है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बहस में हिस्सा लेकर सरकार का पक्ष रखेंगे।